( संस्मरण का एक अंश )
सर्वेश कुमार मिश्र शोधार्थी (हिंदी विभाग)
राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय किशनगढ़,
अजमेर, राजस्थान ।
बात 72 वर्ष पुरानी, सन 1945-46 ई. के लगभग की है । तब
हमारे आराध्य बाबा स्व. फुन्नन मिश्र जी की उम्र लगभग 19 वर्ष थी । बाबा जी का
जन्म 12 दिसम्बर 1927 ई. को ईशापुर ग्राम में हुआ था । इनके पिता पण्डित हरगोविन्द
मिश्र जी प्रकाण्ड विद्वान और ज्योतिष के अच्छे जानकार थे । पूरे गाँव में उनके
सामने कोई सर उठाकर बात नहीं कर सकता था और चेहरा ऐसा था कि जैसे लगता था मानो कि
अभी खून टपकने लगेगा । 6 से 7 फिट ऊँचे कद-काठी के धनी, पूरे गौरांग थे बाबा ।
कहीं भी आना जाना हो वो हमेशा खडाऊं ही पहनते थे । उनके बारे में आज भी जब कभी कोई
चर्चा होती है तो बताने वाला व्यक्ति उत्साह से भर जाता है चाहे उसकी उम्र 98 वर्ष
(श्री रमाशंकर यादव मास्टर के बाबा) क्यों न हो । चलिए काम की बात करते हैं, बखान
करते आज तक कब पन्ना भरा है । हमारे बाबा (स्व.फुन्नन मिश्र) के जीजा (स्व. महादेव
तिवारी) जी 1945 ई. से पहले ही मुंबई (तब बम्बई) में अध्यापक बन चुके थे । उनका
ध्यान जब बाबा जी कि तरफ गया तो उन्होंने उन्हें मुंबई बुला लिया । उस समय बाबा
कक्षा 7 पास किए थे । बाबा किसी तरफ सायद अकेले मुम्बई पहुँच गए । मन तो लग नहीं
रहा था गाँव की गुल्ली-डंडा की याद रह-रह कर सताने लगती तो विचलित से हो जाते ।
एक दिन कहानी नया मोड़ लेती है इन लोगों के बीच प्रगट होते
हैं ठाकुर गंगा प्रसाद सिंह । ये भी रोजगार के सिलसिले में मुंबई पहुँच गए थे ।
हमारे हिंदी साहित्य के इतिहास को अपनी पीठ पर उठाने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल
के परम शिष्य थे ठाकुर गंगा प्रसाद सिंह । इनकी आज भी जब गाँव के लोग चर्चा करते
हैं तो प्यार से गंगा बाबा ही कहते हैं । अपने समय में इन्होंने भी संघर्ष किया है
। गंगा बाबा जब मुंबई में थे तो उस समय के जाने माने बिड़ला परिवार से उनका सम्बन्ध
था । गंगा बाबा उनके बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे । यहाँ तक की हमारे गाँव
ईशापुर में बिड़ला जी के बच्चे गंगा बाबा के साथ आकर 2-3 महीने रहे हैं । गंगा बाबा
ने अथक परिश्रम करके अपने गाँव में पहला स्कूल (तिलक स्मारक इण्टर कालेज,
अमाँवाखुर्द, ईशापुर, जौनपुर, उत्तर-प्रदेश) खोला । गंगा बाबा काफी समय तक ‘श्री
गांधी स्मारक इण्टर कालेज समोधपुर जौनपुर उ.प्र’ के प्रधानाचार्य रहे । उनके
अनुशासन को अगर पास से देखना हो तो आप समोधपुर का भ्रमण कीजिए और कहीं टहलते हुए
वहाँ के वर्तमान प्रधानाचार्य श्री रणजीत सिंह गुरु जी मिल जाएं तो समझो आपको गंगा
बाबा का अनुशासन मिल गया । कितनी सरकारें आई और गई पर आज भी समोधपुर में नक़ल नहीं
होती । हाँ समोधपुर को बदनाम करने वाले आपको एक दो जरूर यह कहते मिल जाएंगे कि ‘नक़ल
होती है पर किसी को पता नहीं चलता ।’ पर
मुझे आज तक ऐसा आभास नहीं हुआ क्योंकि उ.प्र सरकार ने प्रधानाचार्य श्री रणजीत
सिंह गुरु जी को पुरस्कृत कर चुकी है । लग रहा है फिर भटक गया, अच्छा ! तो मैं
मुंबई में था बाबा जी लोगों के साथ । हुआ ये कि गंगा बाबा एक दिन आ गए फूफा जी
यानी हमारे बाबा के जीजा जी के कमरे पर । वहाँ पर गंगा बाबा ने हमारे बाबा को देखा
पर हमारे बाबा उनसे आँख न मिला सके । तो उन्होंने फूफा जी से पूंछा कि- ये पंडित
जी यहाँ क्या कर रहे हैं ? फूफा जी ने
गंगा बाबा को बताया कि इनको नौकरी दिलाने के लिए बुलाया है । तो गंगा बाबा जी ने
तुरंत कहा कि तो गाँव में पुरोहिती कौन करेगा, पण्डित हरगोविन्द जी के बाद ? इस पर
बाबा जी के जीजा जी ने कहा कि – “ बाबू साहब !!! अब एक
चुटकी सीधा से ब्राहमण का पेट नहीं भरेगा ।” गंगा बाबा निरुत्तर हो गए । और
उन्होंने हमारे बाबा जी को आशीर्वाद दिया और जीजा जी से कहा कि “अतिशीघ्र इनको
नौकरी दिलाओ हम भी देखते हैं कहीं अगर मिलती है तो ।”
हमारे बाबा जी कक्षा सात पास होकर
म्युनिस्पैलिटी में ही हेड-मास्टर बनकर सेवानिवृत हुए । और आज हम पी-एचडी करने के
बाद भी ये आशा नहीं कर पा रहे कि हमारी नौकरी पक्की है । कौन बताए प्रधानमंत्री
मोदी जी को कि हमारा भारत कितना बदला है कि योग्यता सड़कों पर भीख माँगने को मजबूर
हो रही है आपके डिजिटल इण्डिया में ।
।। इति
सिद्धम् ।।
लेखक- सर्वेश कुमार मिश्र
ग्राम/पोष्ट ईशापुर, जौनपुर, उ.प्र
दिनांक- 16 सितम्बर 2017
वार- शनिवार, प्रात: 4
बजे

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