शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

प्यारी बिटिया


बिन दांतों का हँसाना तेरा, सारी पीड़ा हर लेना ||
बिना स्वार्थ के हँस देना, बिना स्वार्थ के गुस्सा होना ||
जीवन सफल किया तूने, हम सबके जीवन में आना तेरा ||
बिन मांगे सब मिल जाना, बिना मोल के मुस्काना ||
दादी-दादा का स्वप्न बन, आँगन में फूलों सा खिलाना ||
सितार के तार सा बन जाना, जीवन में संगीत बहा जाना ||
तू मेरे जीवन का कौतूहल, तू मेरे जीवन का स्पंदन ||
तू राग रागिनी मेरी है, तू साज सुरों की मलिका है ||
तू बिटिया मेरी रानी है, जीवन की तू मेरी कहानी है ||

सर्वेश कुमार मिश्र
स्व-रचित कविता
दिनांक- 20-8-2017
शाम 7:00 बजे
राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय अजमेर से

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें