बिन दांतों का हँसाना तेरा, सारी पीड़ा हर लेना
||
बिना स्वार्थ के हँस देना, बिना स्वार्थ के
गुस्सा होना ||
जीवन सफल किया तूने, हम सबके जीवन में आना
तेरा ||
बिन मांगे सब मिल जाना, बिना मोल के मुस्काना
||
दादी-दादा का स्वप्न बन, आँगन में फूलों सा
खिलाना ||
सितार के तार सा बन जाना, जीवन में संगीत बहा
जाना ||
तू मेरे जीवन का कौतूहल, तू मेरे जीवन का
स्पंदन ||
तू राग रागिनी मेरी है, तू साज सुरों की मलिका
है ||
तू बिटिया मेरी रानी है,
जीवन की तू मेरी कहानी है ||
सर्वेश कुमार मिश्र
स्व-रचित कविता
दिनांक- 20-8-2017
शाम 7:00 बजे
राजस्थान केन्द्रीय
विश्वविद्यालय अजमेर से

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