सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

गोरी आओ खेले रंग

गोरी आओ खेले रंग, लोग हो जाएँ देख के दंग
चढ़े भंग पे भंग, बाजे ढोल और मृदंग ||
प्यार के रंग का काढ़ा बना लें, भावनाओं की भंग चढा लें
दुश्मनी को जम कर भुला लें, आओ हृदय से हृदय मिला लें
अपने मन का कमल खिला लें, रोते हुए को आज हँसा लें
रंग अबीर का त्यौहार मना लें, सब को अपना परिवार बना लें
गोरी आओ खेले रंग, लोग हो जाएँ देख के दंग
चढ़े भंग पे भंग, बाजे ढोल और मृदंग ||
गोरे गालों को मसलकर, याद कर अपनी जवानी
बन पड़े इतिहास पलटकर, बना ले अपनी कहानी
रंग संग का खेल खेलकर, कर कोई ऐसी शैतानी
सारे मन का भेद भुलाकर, अपनी कर ले अमर निशानी
गोरी आओ खेले रंग, लोग हो जाएँ देख के दंग
चढ़े भंग पे भंग, बाजे ढोल और मृदंग ||
होरी छोरी से तुम खेलो, होरी छोरे से तुम खेलो
होरी शिवराज में खेलो, होरी रामराज है खेलो
पर रहे ध्यान यह सुन लो, अपनी मर्यादा ना भूलो
यह ध्यान रख के जिलो, तुम नजरों से ना गिरलो
गोरी आओ खेले रंग, लोग हो जाएँ देख के दंग
चढ़े भंग पे भंग, बाजे ढोल और मृदंग || 

होली पर विशेष 
सर्वेश कुमार मिश्र 
दिनांक- 09-03-16
समय- रात्रि- 2:10 
राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय

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