पता नहीं उनके
घरवालों को याद है या नहीं पर मुझे बाबा की खुरपी याद आती है । कितना सीधा पर
शालीन व्यक्तित्त्व था उनका, आज भी वो सब याद आता है । आरपी बाबा जी के घर से उनका
अटूट संबंध था । दोनों बाबा भाई की तरह रहते थे । जाति का बंधन हमने अपने गाँव
जन्म के पहले से ही टूटते देखा है । इसलिए आज जातिगत भावना से ऊपर उठ चूका हूँ ।
कौन पासी है, कौन बारी है, कौन चमार है यह हमारे गाँव ने शायद ही कभी देखा हो । हमारे
यहाँ कर्म प्रधान हुआ जाति नहीं ।
हमारे यहाँ स्व. फिरतु
चमार को कभी चमार नहीं कहा गया उनको सभी फिरतु बाबा या दादा, काका ही कहते थे,
श्री निहोर पासवान बाबा को हमारे गाँव के सभी बाबा चाहे वो बड़ेबाबू बाबा हों या
पारस बाबा या हमारे अपने बाबा सब उनको निहोर भईया ही कहते थे । अब जिसकी खुरपी याद
आती है कोई उन्हें बाबा कहता कोई काका कहता कोई कक्का कहता कोई दादा कहता कोई राउत
बाबा कहता पर किसी ने आज तक खेदू नहीं कहा होगा ।
हाँ हमें खेदू बाबा
की खुरपी याद आती है । उम्र के आखरी पड़ाव पर भी उनकी जवानी याद आती है । वो एक साथ
कई काम करने में माहिर थे जैसे वो नाऊ , बारी , पंडित तीनों का काम एक साथ करते थे
। जब तक वो जिन्दा रहे तब तक शायद ही कोई बचा हो जिसकी शादी उन्होंने न कराई हो ।
यहाँ तक की शादी कराने वाले पंडित भी उनके बिना अपने आपको अधूरा ही मानते रहे ।
अरे उन्होंने तो हमसे यहाँ तक भी बताया है कि कई शादियों में विवाद होने पर उन्होंने
अकेले अपने दम पर शादी कराई है । मैं अपने आपको बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि
मेरी शादी भी उन्होंने ही कराई । बाबा आजी की मोह माया ने हमें सन 1999 में कस कर
बाँध दिया शादी के बंधन में, तब मैं 10वीं भी नहीं पास था । खेदू बाबा पूरी रात
हमारे साथ ही रहे और जितना रूपया शादी होते समय मिलता मैं उनको देता गया और वो
रखते गए । जब दूसरे दिन घर आया तो पूरा पैसा हमें दे दिए पर हमने उसे अस्वीकार कर
दिया और हमने उनसे धीरे से कहा कि यह सब आपका है और हमें गिनना भी नहीं है कि
कितना है । यह भी कारण हो सकता है उनके निकट आने का । वो जब भी लखनऊ अपने पोते
प्रवीण के पास जाते तो हमारे चाचा चाची जी से मिलने जरूर जाते । आज भी उनका परिवार
वहीं पास में ही रहता है पर अब कोई नहीं आता जाता । उनके एक मात्र पुत्र मुन्ना
काका भी महान कलाकार हैं ख़ैर इनके बारे में फिर कभी, अभी तो उनको लकवा मार दिया है
पर वो उसी प्रकार हँसते हैं और अब तो धीरे धीरे चलना शुरू भी कर दिया है किसी का
सहारा लेकर ।
सुर्ती खाने खिलाने
के बहाने खेदू बाबा गाँव के हमउम्र लोगों के साथ घंटों बात किया करते थे पर बात
करते समय जब खुरपी धीरे से उनके हाथ को सहलाती और चलने का इशारा करती तो वो तुरंत
खड़े हो जाते और अपने जानवरों के लिए खेत में घास छिलने निकल जाते । बरसात के समय
में हमने भी उनके साथ खूब घास काटी है पर उनकी खुरपी का जोड़ न दे पाया कभी ।
खुरपी की याद इसलिए
आती है कि उनके हाथ में जब हमने देखा तो वही खुरपी देखी और कंधे पर अक्सर लाल गमछा
देखा । एक दिन बाबा के हाथ से खुरपी लेकर देखने लगा कि अचानक से वह फिसल गई और
जाकर उनकी गोद में लेट गई । उसकी फिसलन और उसके बेंत पर निशान आज भी किसी आश्चर्य
से कम नहीं । खुरपी का लोहा भी बहुत चिंतित था कि कब हमको छोड़ेंगे लगता है अब जान
ही निकाल लेंगे ।
खुरपी का रूप देखकर
हमने खेदू बाबा से पूछा कि यह आपके साथ कितने वर्षों से है तो उनका जबाब सुन मेरी
बड़ी आँखें इतनी फैल गई की मुसरा (तालाब) भी लजाने लगा । बाबा ने कहा कि यही कोई
बीस वर्ष से यह खुरपी हमारे साथ है एक बिटिया की तरह हमने इसका और इसने हमारा ख्याल
रखा है । फिर उन्होंने एक बड़ी बात कह दी उन्होंने कहा कि मेरे जाने के बाद शायद ही
कोई मेरी खुरपी बिटिया का ख्याल रखे इसलिए मेरे मरने पर मेरी चिता के साथ इसको भी
रख देना अगर महराज आप इहाँ रहअ तो ।
आपको बता दें कि
खुरपी की बेंत पर उनके हाथों के निशान आज भी देखे जा सकते हैं क्योंकि 20 वर्ष से
न तो लोहा बदला गया और न बेंत ही दूसरा लगा । लोहा घिसकर छोटा हो गया था और बेंत
पर पड़ा निशान बेंत के अंदर लोहे से मिलने लगा था । खेदू बाबा को परपोता हुआ अर्थात
13 नवम्बर 2017 को प्रवीण को प्रथम पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई । हम और हमारा ग्रुप
उनको अनंत शुभकामनाएं देता है ।
उम्र के आखरी पड़ाव पर भी उनकी जवानी याद आती
है ।
मुझे आज भी उनकी वो खुरपी याद आती है ।
उनका शालीन सा चेहरा और वह लाल गमछा याद आता
है ।
उनका नाऊ, बारी और पंडिताई का काम करना यादा
आता है ।
पर मुझे आज भी उनकी वो खुरपी याद आती है ।
देखिए मेरी कलम अगला
प्रेम किससे करती है । शेष फिर कभी ..........
एक
अवचेतन मन में पड़ा संस्मरण
सर्वेश कुमार मिश्र शोधार्थी (हिंदी विभाग)
राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय, अजमेर, राज
।
दिनांक – 18/11/2017,
समय- सुबह 8 बजे
ग्राम/पोष्ट- ईशापुर, जनपद- जौनपुर ।
उत्तर प्रदेश । 223102
संपर्क सूत्र –
९५५९६३६७३६।
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