जो आया है उसको मरना है
कोई डेंगू से मरता है, कोई मलेरिया से मरता है
कोई सत्ता की हनक से, सत्ता की चौखट पर मरता है
ना जाने कितने लोग दुर्घटनाओं में मर जाते हैं
क्या वे जानते हैं कि आज मुझे मरना है
पर मर जाते हैं ! मर जाते हैं !! मर जाते हैं!!!
ऐसे ही तमाम लोग रोज मर जाते है
पर क्या उनका मरना भी कोई याद कर पाता है
आओ मरने की जिद करते हैं
स्वतंत्रता के पहले देश के लिए लोग मरे, स्वतंत्रता सेनानी कहलाए
आजादी के बाद अधिकांश लोग मरे, तो बड़े प्रेम से भ्रष्टाचारी कहलाए
बड़ी-बड़ी बातें हम करते हैं, आए दिन सीमा पर देश के जवान मरते हैं
अपनी मातृभूमि के लिए वो शहीद होने की जिद किए बैठे हैं, पर हम
बेईमानी, भ्रष्टाचार,
नपुंसकता का कोढ़ पैदा करने की जिद किए बैठे हैं
आओ फिर से मरने की जिद करते हैं
कौन जानता है सुबह होगी और मैं जिंदा रहूँगा
तमाम स्वप्न कल सुबह होते ही पूरे हो जाएंगे
क्या पता ! तुम हार्ट अटैक से मर जाओ !!!
तुम प्लेग, भुखमरी, दंगा से मर जाओ !
क्यों ना यूँ मरा जाए जिससे तुम्हारा गाँव-घर याद करे
तुम्हारा देश तुम्हें युग-युग तक याद करे
तुम्हारे लिए कोई
‘रहमान’ फिर से संगीत तैयार करे
आओ यह माने कि आजादी नहीं मिली हमें
आओ यह माने कि अंग्रेज नहीं गए अभी
आओ यह माने कि सूरज नहीं उगा अभी
आओ यह माने कि आजाद, भगत सिंह गए नहीं कहीं
मैं भ्रष्टाचार, बेईमानी से लड़कर मरुँ
मैं नेताओं की चोचलेबाजी से लड़कर मरुँ
मैं गरीबी, किसान, और अपनी बेटियों के लिए लड़कर
मरुँ
मैं अपनी संस्कृति के खिलाफ उठने वाली शक्ति से लड़कर
मरुँ
हाँ पर ध्यान रहे कि मैं मरूँगा कल
आओ इनमें से कोई एक जिद करते हैं
आओ फिर से मरने की कोशिश करते हैं
लेखक- सर्वेश कुमार मिश्र
विकास खण्ड- सुइथाकला
जनपद – जौनपुर
दिनांक- 11-11-2017
समय –प्रात: 5 बजे
संपर्क-सूत्र – 9559636736




