अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा
करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते
हैं ||
दूजे के सहारे से उठने को, क्यों सौंपा तूने
इस जीवन को
जो खुद पेट पालने को, दूसरे के सहारे जीते हैं
||
जिससे आत्मतृप्ति मिले, उस ईश्वर का भोजन करते
हैं
गाली गलौज करने को, मंदिर-मस्जिद को चुनते हैं
||
अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा
करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते
हैं ||
हम सोच रहे हैं जन हित में, वे सोच रहे अपने
हित में
क्यों सोचे हम उनके हित में, जो ईश्वर से कभी
न डरते हैं ||
जागो सभी कल्याण करो, आज कहर ढाया है
फिर प्रकृति ने उन सबको, अपनी गोद में सुलाया
है |
न देखा होगा स्वप्न कभी, अंत समय ऐसा होगा
सागर लहरों की बाहों में, चिर निद्रा में सोता
होगा ||
हम देख रहें हैं काली लहरें, जो जीवन अंधकारमय
करते हैं
जागो हे करुण हृदय प्राणी, हम तुमको सहायतार्थ
प्रस्तुत करते हैं |
अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा
करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते
हैं ||
-
सर्वेश कुमार मिश्र
दिनांक
– 03-01-2005, सुबह 4 बजे