रविवार, 26 नवंबर 2017

अधिकार


अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते हैं ||
दूजे के सहारे से उठने को, क्यों सौंपा तूने इस जीवन को
जो खुद पेट पालने को, दूसरे के सहारे जीते हैं ||
जिससे आत्मतृप्ति मिले, उस ईश्वर का भोजन करते हैं
गाली गलौज करने को, मंदिर-मस्जिद को चुनते हैं ||
अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते हैं ||
हम सोच रहे हैं जन हित में, वे सोच रहे अपने हित में
क्यों सोचे हम उनके हित में, जो ईश्वर से कभी न डरते हैं ||
जागो सभी कल्याण करो, आज कहर ढाया है
फिर प्रकृति ने उन सबको, अपनी गोद में सुलाया है |
न देखा होगा स्वप्न कभी, अंत समय ऐसा होगा
सागर लहरों की बाहों में, चिर निद्रा में सोता होगा ||
हम देख रहें हैं काली लहरें, जो जीवन अंधकारमय करते हैं
जागो हे करुण हृदय प्राणी, हम तुमको सहायतार्थ प्रस्तुत करते हैं |
अधिकार न उनको दे देना,जो अनाधिकार की चेष्टा करते है
कार्य न उनको दे देना, जो बेकार की चिंता करते हैं ||
-         सर्वेश कुमार मिश्र

दिनांक – 03-01-2005, सुबह 4 बजे

शनिवार, 18 नवंबर 2017

ओ! जीवन के थके पखेरू

1.                         

ओ! जीवन के थके पखेरू           
बढ़े चलो हिम्मत मत हारो
           पंखों में भविष्य बंदी है
           मत अतीत की ओर निहारो
         क्या चिंता धरती यदि छूटे उड़ने को आकाश बहुत है ।
         जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम, विश्वास बहुत है ।  - बलवीर सिंह रंग