शनिवार, 18 नवंबर 2017

ओ! जीवन के थके पखेरू

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ओ! जीवन के थके पखेरू           
बढ़े चलो हिम्मत मत हारो
           पंखों में भविष्य बंदी है
           मत अतीत की ओर निहारो
         क्या चिंता धरती यदि छूटे उड़ने को आकाश बहुत है ।
         जाने क्यों तुमसे मिलने की आशा कम, विश्वास बहुत है ।  - बलवीर सिंह रंग

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