सबने कहा-
किताब पढ़ ,
गीता पढ़,
रामायण पढ़,
देश के क्रांतिकारी शहीदों, दार्शनिकों के विचार पढ़,
इतिहास पढ़ ,
भूगोल पढ़,
पोथी और पुराण पढ़ ।
सब कुछ पढ़कर जब चलना चाहा
तो पीछे से आवाज आई,
निरा पागल है तू !
यह सब दिखावे के लिए पढ़ना है
अमल में लाने के लिए थोड़े ।
तुझे तो जमाने से चार हाथ आगे बढ़कर चलना है ।
चलना ही नहीं ?
घसीटना है,
रगड़ना है,
चिथड़े चिथड़े करना है
उन सब को, जो बचपन में
परिवार,
समाज,
विद्यालय ने तुझे संस्कार के रूप में सिखाया है ।
- सर्वेश कुमार मिश्र
स्व रचित । समय - 17 अक्टूबर 2018, 10:11 am
जयपुर, राजस्थान ।