रविवार, 15 मार्च 2020

🌼 बस एक छोटा-सा संकल्प 🌼

🌼 बस एक छोटा-सा संकल्प 🌼

वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से 
वो और थे जो हार गए आसमान से 
- फ़हीम जोगापुरी

मुझे पता है कि मुठ्ठी भर बच्चों से मैं गाँव की तस्वीर नहीं बदल सकता और इन्हीं बच्चों में से आगे चलकर कोई मेरे परिवार या मेरे लिए दुख का कारण बन सकता है, मेरे परिवार का विरोधी बन सकता है पर यह भी विश्वास है कि इसी में से एक बालक डॉक्टर, इंजीनियर, सेना का जवान या जो कुछ वह चाहे बन सकता है ।

मुझे यह भी पता है कि मैं किसी विकलांग या अंधे व्यक्ति की मदद करता हूँ तो वे मेरे लिए कुछ नहीं कर सकते पर प्रकृति सब देखती है और आप जो भी इस धरा पर करते हैं  वह आपको आपकी कल्पना से कई गुना अधिक देती है । जैसे देश व समाज के लिए मरने वालों के लिए उसने अपनी जमीन के कुछ खण्ड को पवित्र बना दिया जिसमें महात्मा गाँधी की समाधि स्थल (राजघाट), भारतरत्न अटल जी की समाधि स्थल 'सदैव अटल'  मक्का, मदीना व अन्य बहुत कुछ है । वह अपने को कटाकर कागज बनाती है और उसमें उनके नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित करती है जो देश के गौरव बन चुके हैं ।

मुझे आप से मतभेद, मनभेद है, हो भी सकता है पर आपके बच्चे से नहीं इसलिए बालमन को तो मिलने दो, उनसे जुड़ने दो, उन्हें तो कुछ सीखने दो ।

इन्हीं सब संकल्पों व कल्पनाओं के साथ सात महीने बाद सात दिन घर पर रहा । अपने घर का काम करते हुए सात दिन बच्चों को बिस्तर से खुद जाकर उन्हें उठाया हूँ और उनके साथ खूब खेलकूद करते हुए जो भी इस अल्पबुद्धि में अच्छा था उनको देने की कोशिश किया हूँ ।

मोदी योगी व अन्य देश का सुधार करें मैं अपने गाँव को किंचित मात्र भी बदल सका तो जीवन सार्थक हो जाएगा ।

लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं 
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है 
- अमीर क़ज़लबाश

💐 आपका सर्वेश 💐
🍁 वन्देमातरम 🍁

16 मार्च 2020
सुबह 5 बजे आगरा से

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